Wednesday, May 20, 2026
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उत्तराखण्ड

पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

  • खड़खड़ी श्मशान घाट में राजकीय सम्मान के साथ किया गया अंतिम संस्कार
  • सेना एवं पुलिस के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर दी अंतिम सलामी 
  • मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय विद्युत मंत्री  मनोहर लाल खट्टर, सहित मंत्रीगण एवं जनप्रतिनिधि हुए शामिल

हरिद्वार। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेनि) को हरिद्वार स्थित खड़खड़ी श्मशान घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी एवं केंद्रीय विद्युत मंत्री  मनोहर लाल खट्टर भी मौजूद रहे।

मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (से.नि) की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा और हर वर्ग के लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।अंतिम संस्कार के दौरान सेना एवं पुलिस के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी। उनके पुत्र  मनीष खंडूरी ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की।

इस दौरान मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी जी का निधन राज्य और देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने सेना, केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री के रूप में पारदर्शिता और अनुशासन के साथ उत्कृष्ट कार्य किए। उन्होंने कहा कि वह हम सभी के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेंगे। उनकी कमी एक अभिभावक के रूप में हमेशा महसूस होगी।

केंद्रीय विद्युत मंत्री  मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी जी का जीवन सादगी, अनुशासन और ईमानदारी का उदाहरण रहा। उन्होंने मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और सेना अधिकारी के रूप में हर दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाया। उनके कार्यों को उत्तराखंड ही नहीं, पूरा देश हमेशा याद रखेगा। सुशासन और लोकपाल जैसे महत्वपूर्ण विचारों को आगे बढ़ाने में उनका योगदान प्रेरणादायक रहा।

इस अवसर पर पूर्व राज्यपाल महाराष्ट्र/पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड  भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व मुख्यमंत्री  विजय बहुगुणा , डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक,  तीरथ सिंह रावत, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, महामंत्री संगठन  अजेय कुमार, सांसद अनिल बलूनी,  अजय भट्ट , कैबिनेट मंत्री  सुबोध उनियाल, सतपाल महाराज, डॉ . धन सिंह रावत,  गणेश जोशी,  सौरभ बहुगुणा,  मदन कौशिक,  प्रदीप बत्रा,  खजान दास, विधायकगण, संतगण मौजूद थे।

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