उत्तराखंड : रेलवे स्टेशन होने के बाद भी ट्रेन पकड़ने लिए जाना पड़ता है नजीबाबाद

कोटद्वार : उत्तराखंड विकास पार्टी ने की कोटद्वार से मसूरी एक्सप्रेस गढ़वाल एक्सप्रेस और लखनऊ, कलकत्ता, मुम्बई, बड़ौदा, श्रीनगर (कश्मीर), गुवाहाटी आदि तक रेल सेवायें उपलब्ध कराने की मांग।अवैध खनन के कारण रेलवे का सालों पुराना पुल गिर गया था, जिस वजह से नए पुल के बनने तक कोटद्वार तक रेलों का संचालन बन्द हो गया था।

पुल बन जाने के बाद अन्य रेलगाड़ियों का संचालन तो शुरू हुआ, मगर कोटद्वार से चलने वाली मसूरी एक्सप्रेस का संचालन बन्द हो गया। जिस वजह से लोगों को मसूरी एक्सप्रेस से आवाजाही करने के लिए नजीबाबाद आना जाना करना पड़ता है।

नजीबाबाद में मसूरी एक्सप्रेस रात्रि के करीब साढ़े तीन बजे के आसपास पहुंचती है। इस वजह से गढ़वाल निवासियों को नजीबाबाद जैसी जगह में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसमें खास तौर पर पर्स और सामान को सुरक्षित रख पाना मुख्य है। बार्डर से लौट रहे सैनिक के लिए अपने सामान के साथ प्लेटफार्म से बाहर आना एक युद्ध सरीखा ही है।

इतनी सुबह नजीबाबाद से कोटद्वार के लिए कोई बस या रेलगाड़ी भी नहीं चलती। ऐसे ही कोरोना काल मे कोटद्वार से गढ़वाल एक्सप्रेस को बन्द कर दिया गया था जो आज तक शुरू नहीं हुई है । जिससे गरीब तबके को बहुत नुकसान हुआ है।

ऐसा महसूस होता है कि भाजपा सरकार एक तबके विशेष के लिए सरकारी सेवाओं को चलाना चाहती है और उस तबके में गरीब मजदूर शामिल नहीं है जो दस बीस रुपये में अपनी मंजिल पहुंच जाता था।

कोटद्वार के व्यापारियों द्वारा कोटद्वार से एक रेलगाड़ी सुबह दिल्ली जाकर वापस रात में कोटद्वार के लिए मांग की गई थी मगर भाजपा सरकार ने उस ओर भी ध्यान नहीं दिया।

उत्तराखण्ड विकास पार्टी के अध्यक्ष मुजीब नैथानी ने कोटद्वार से पुनः मसूरी एक्सप्रेस वे गढ़वाल एक्सप्रेस के संचालन की मांग की है। साथ ही कलकत्ता, लखनऊ,इलाहाबाद, मुंबई, श्रीनगर, बड़ौदा, गुवाहाटी आदि शहरों तक रेल सेवा उपलब्ध कराने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि मसूरी एक्सप्रेस के बन्द होने से हमारे फौजी भाइयों को बड़ी परेशानी उठानी पड़ रही है। देशप्रेमी होने का दावा करने वाली सरकार को देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के साथ ऐसा अन्याय नहीं करना चाहिए।

एक सैनिक को देश की रक्षा के लिए बॉर्डर आने जाने के लिए कोटद्वार से ही रेल सेवा उपलब्ध कराया जाना ही सरकार का कर्तव्य है, जिसका पालन सरकार नहीं कर रही है।

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